Dhruvswamini (Play) by Jaishankar Prasad_Paperback

Dhruvswamini (Play) by Jaishankar Prasad_Paperback
Hindi
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978-9-393-26751-1
‘‘मैं केवल यही कहना चाहती हूँ कि पुरुषों ने स्त्रियों को अपनी पशु संपत्ति समझ कर उन पर अत्याचार करने का जो अभ्यास बना लिया है, वह मेरे साथ नहीं चल सकता।’’ स्त्री-पात्र को केन्द्र में रखकर लिखा ध्रुवस्वामिनी नाटक नारी चेतना की एक सशक्त रचना है। इसमें स्त्री को पुरुष के अधीन नहीं, बल्कि अपनी स्वतंत्र सोच रखने वाली पात्र के रूप में दर्शाया गया है। इस नाटक का कालखंड तब का है, जब गुप्त साम्राज्य अपने सबसे कमज़ोर शासक के हाथों में था।  ध्रुवस्वामिनी जयशंकर प्रसाद की अंतिम और सबसे श्रेष्ठ नाट्य कृति है। 1933 में पहली बार प्रकाशित नाटक की कथा वस्तु आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी तब थी।