Premchand Ki Stree Kathayen

Premchand Ki Stree Kathayen
Hindi
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978-9-349-16235-8
₹ 175.00 ₹ 250.00
हिन्दू समाज ने अपनी देवियों के साथ बहुत दिनों जुल्म किया और अब उसे इस जुल्म की जड़ खोदने में विलंब न करना चाहिए।' प्रेमचंद 1931 में स्त्रियों को संपत्ति के अधिकार पर आए शारदा कानून के पक्ष में उक्त टिप्पणी लिखने वाले प्रेमचंद सच्चे स्त्रीवादी लेखक थे जिनकी कहानियों और उपन्यासों में स्त्री पुरुष समानता के पक्ष में जबरदस्त रचनात्मक लड़ाई है। सेवासदन और निर्मला जैसे स्त्री उपन्यासों के साथ प्रेमचन्द ने अपनी कहानियों में भी स्त्री जीवन की विसंगतियों से मुठभेड़ की। उनके विशाल कहानी संसार से ऐसी कुछ श्रेष्ठ और समीचीन स्त्री विषयक कहानियों को चुनकर यह संग्रह बनाया गया है जिसे पाठक आज भी प्रासंगिक और महत्त्वपूर्ण पाएँगे । हिन्दी साहित्य के सुपरिचित अध्येता, आलोचक और संपादक डॉ. पल्लव ने प्रेमचंद की कहानियों का यह संकलन तैयार करने के साथ एक लम्बी भूमिका भी लिखी है। उनकी अनेक मौलिक व संपादित किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें 'प्रेमचंद की व्यंग्य कथाएँ', 'प्रेमचंद की स्वतंत्रता संग्राम कथाएँ', 'प्रेमचंद की हिन्दू मुस्लिम सद्भाव कथाएँ' तथा 'एक दो तीन' उल्लेखनीय हैं। साहित्य संस्कृति के संचयन 'बनास जन' का संपादन कर रहे डॉ. पल्लव को 2008 का भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता का 'युवा पुरस्कार', 2012 का 'आचार्य निरंजननाथ प्रथम कृति सम्मान' तथा 2018 का 'राजस्थान पत्रिका सृजन पुरस्कार' सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। 2010 से डॉ. पल्लव दिल्ली के प्रतिष्ठित हिन्दू कॉलेज में कार्यरत हैं।