Upar Baitha Ek Nithalla

Upar Baitha Ek Nithalla
Hindi
0
978-9-349-16226-6
₹ 263.00 ₹ 375.00
विष्णु नागर जितने अच्छे कवि और कथाकार हैं, उतने ही सशक्त व्यंग्यकार भी। उनके व्यंग्य-लेखन की विशेषता है कि वे अपने आसपास की छोटी-से-छोटी चीज़ों से लेकर समाज व दुनिया के बड़े-से-बड़े मुद्दों पर अपनी पैनी नज़र रखते हैं। और जिस तरह वे चीज़ों को देखते व समझते हैं, उसको अपने अनूठे अंदाज में तीखी कलम से कागज़ पर उतारते हैं। उनके व्यंग्य से कोई बच नहीं पाता। उनका व्यंग्य पढ़ते-पढ़ते पाठक कभी मुस्कुराता है, कभी तिलमिला उठता है और कभी हालात पर अपना माथा पकड़ लेता है। 2025 में चुनिंदा व्यंग्यों का संग्रह आदमी की पूँछ प्रकाशित हुआ था जिसे आम पाठकों और आलोचकों ने हाथोंहाथ लिया था। ऊपर बैठा एक निठल्ला उसी क्रम में उनके 76 चयनित चुनिंदा व्यंग्यों का संग्रह है। साहित्य में योगदान के लिए 2020 में ‘जनकवि मुकुटबिहारी सरोज सम्मान’, 2017 में ‘राही मासूम रज़ा सम्मान’, 2008 में ‘व्यंग्यश्री पुरस्कार’, 2003 में 'शमशेर सम्मान ', 2001 में ‘शिखर सम्मान’ और दिल्ली हिन्दी अकादेमी के ‘साहित्य सम्मान’ से सम्मानित विष्णु नागर हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित कवि, कथाकार और व्यंग्यकार हैं। अभी तक उनके आठ कहानी-संग्रह, नौ कविता-संग्रह, नौ व्यंग्य-संग्रह और अनेक लेख व निबंध-संग्रह प्रकाशित हैं। साहित्य के पाँच दशकों के लम्बे सफ़र में वे पत्रकारिता में भी सक्रिय रहे। वे नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान और नयी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित दैनिक समाचार-पत्रों में कार्यरत रह चुके हैं। मासिक पत्रिका कादंबिनी और साप्ताहिक शुक्रवार के वे सम्पादक रहे हैं। पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए ‘शिरोमणि पुरस्कार 2014’ से उन्हें अलंकृत किया गया था।