Premchand Ki Hindu-Muslim Sadbhav Kathayen
राम रहीमा एक है, नाम धराया दोय ।
कहै कबीर दो नाम सुनि, भरम परौ मति कोय ॥
कबीर
हिन्दू और मुस्लिम समुदाय भारत में कोई हज़ार वर्ष से साथ रहते आ रहे हैं। इनके सहजीवन को देश के सांस्कृतिक वातावरण में देखा गया है। कबीर हों या प्रेमचंद, सभी रचनाकारों ने धर्म आधारित विभाजन को अस्वीकार कर आपसी सद्भावना पर बल दिया है। प्रेमचंद के विशाल कथा संसार से साझा संस्कृति की ऐसी कहानियों को चुनकर पाठकों के लिए यह संग्रह तैयार किया गया है। प्रेमचंद की इन कहानियों में भारत के हिन्दू और मुस्लिम समुदायों का सह जीवन और सांस्कृतिक जुड़ाव देखा जा सकता है।
हिन्दी साहित्य के सुपरिचित अध्येता, आलोचक और संपादक डॉ. पल्लव ने प्रेमचंद की कहानियों का यह संकलन तैयार किया है और एक लम्बी भूमिका भी लिखी है। उनकी अनेक मौलिक संपादित किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें प्रेमचंद की व्यंग्य कथाएँ, प्रेमचंद की स्वतंत्रता संग्राम कथाएँ, प्रेमचंद की स्त्री कथाएँ तथा एक दो तीन उल्लेखनीय हैं। साहित्य संस्कृति के संचयन बनास जन का संपादन कर रहे डॉ. पल्लव को 2008 का भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता का 'युवा पुरस्कार', 2012 का 'आचार्य निरंजननाथ प्रथम कृति सम्मान' तथा 2018 का 'राजस्थान पत्रिका सृजन पुरस्कार' सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। 2010 से डॉ. पल्लव दिल्ली के प्रतिष्ठित हिन्दू कॉलेज में कार्यरत हैं।
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