Konkan Cookbook
प्राकृतिक सुंदरता से सजा है कोंकण प्रदेश। अथाह-सागर, धूप में चमचमाते रेतीले किनारे, नीले सागर पर उठती लहरें तथा हवा में लहराते नारियल के वृक्ष। जितनी लुभावनी यहाँ की सृष्टि है उतना ही लक्षणीय है यहाँ का इतिहास। सागर की तूफानी लहरों से जूझते, पथरीले जलदुर्ग, इस भूमि के वीरों की गाथाएँ सुनते हैं। ऐसी गौरवशाली कोंकण भूमि की "खान-पान संस्कृति" के रसीले तथा चटपटे सफर पर आपको ले जा रहे हैं प्रसिद्ध पाक-कला विशेषज्ञ संजीव कपूर।
कोंकणी खासियत से परिपूर्ण कई खान-पान गृह आज कल लोकप्रिय हो रहे हैं। खाना बनाने वाले हर हाथ का स्वाद अलग होता है। हर घर की अपनी विशेषता होती है, पीढ़ियों से चले आ रहे नुस्खे होते हैं, राज संजोये होते है। कोंकणी खाद्यान्नों के इसी घरेलूपन ने सजीव कपूर जैसे पाक कला के शिल्पी का मन मोह लिया, तथा यही कारन है कि सहजता से हाथ न आने-वाला यह खजाना उन्होंने अपनी इस 'कोंकण कुकबुक' में हम सब के लिए खोल दिया है। इसमें आप कोंकण के विभिन्न घरों, समाजों में बनने वाले मांसाहारी, शाकाहारी पदार्थ, पकवान मसाले आदि का विवरण पा सकेंगे। पाक-विधि के तौर-तरीकों तथा प्रमाणों को संजीव कपूर ने इतना सरल बना कर प्रस्तुत किया है कि कोई नौसीखिया रसोइया भी सहजता से बना सके।
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