Dansh

Dansh
Hindi
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978-8-170-28855-8
राजेन्द्र मोहन भटनागर ने अपने उपन्यास 'दंश' के लिए महाभारत के पात्र एकलव्य को चुना है। गुरु द्रोणाचार्य एकलव्य को अपना शिष्य बनाने से इनकार कर देते हैं, लेकिन वह उनकी मूरत सामने रखकर अपनी धनुर्विद्या साधता रहता है। आखिर जब द्रोणाचार्य को पता चलता है कि एकलव्य उनके प्रिय शिष्य अर्जुन को मात दे सकता है, तो वे गुरु-दक्षिणा में उसका अंगूठा मांग लेते हैं। हज़ारों साल पहले जो 'दंश' एक गुरु ने अपने शिष्य को दिया था, उसकी टीस आज भी हमारा समाज महसूस कर रहा है। कितनी ही प्रतिभाओं को केवल इसलिए उभरने का मौका नहीं मिलता, क्योंकि वे किसी धनी या प्रभुत्वसंपन्न परिवार से संबंध नहीं रखतीं। एकलव्य किसी एक व्यक्ति या वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे समाज की दमित प्रतिभाओं का प्रतिनिधि है।