Hind Swaraj (English)

Hind Swaraj (English)
English
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978-8-170-28851-0
₹ 69.00 ₹ 99.00
1908 में लिखी हिन्द स्वराज पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारा मार्गदर्शन करती रही है। यह आज भी उतनी ही प्रासंगिक और लोकप्रिय है जितनी इसे लिखे जाने के समय थी। गाँधीजी ने इसी पुस्तक के माध्यम से पहली बार स्वराज की अवधारणा का औपचारिक प्रतिपादन और उसकी व्याख्या की थी। उनका मानना था कि स्वराज एक पवित्र साध्य है इसलिए उसे प्राप्त करने के साधन भी पवित्र होने चाहिए। 'स्वतंत्रता क्या है' और 'इसे कैसे प्राप्त किया जाए', जैसे विभिन्न प्रश्नों पर गाँधीजी के उत्तर चरित्र और चिंतन-प्रक्रिया के सम्बन्ध में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।कभी महत्त्व न खोने वाले विभिन्न मूल्यों की व्याख्या करती यह किताब गाँधीजी के विचारों का एक दुर्लभ दस्तावेज़ है।