Vanphool
एक आत्मकथात्मक रचना जिसमें लेखक के बचपन से प्रारम्भ होकर उसके जीवन के उतार-चढ़ाव, संघर्ष का बहुत ही सजीव, सरस चित्रण है। एक पिछड़े ग्राम का साधारण व्यक्ति कैसे अपनी ईमानदारी और श्रम से जीवन में विशिष्ट स्थान प्राप्त करता है। एक जीवंत आत्मकथा जो उपन्यास से भी अधिक रोचक है।
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