Samagra Upanyaas
प्रस्तुत संकलन में कमलेश्वर के दस उपन्यास- एक सड़क सत्तावन गलियां, लौटे हुए मुसाफिर, तीसरा आदमी, डाक बंगला, समुद्र मे खोया हुआ आदमी, काली आंधी, आगामी अतीत, वही बात, सुबह...दोपहर...शाम..., रेगिस्तान- कालक्रमानुसार दिए गए हैं। साथ ही प्रत्येक उपन्यास के लिए उन्होंने नई भूमिकाएं भी लिखी हैं।
हिंदी के कथाकारों में कमलेश्वर का अपना बिल्कुल अलग और विशिष्ट स्थान है, जो 'कितने पाकिस्तान' के प्रकाशन के बाद सफलता और यश के शिखरों को छूने लगा है। वास्तविक जिंदगी की उनकी पकड़ आश्चर्यजनक रूप से मजबूत है और उनके कथा साहित्य ने रचनात्मकता के साथ- साथ जीवन और इतिहास के चिंतन के नए द्वार भी खोल दिए हैं।
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