Pair Tale Ki Zameen
कहानी और उपन्यास के अतिरिक्त मोहन राकेश ने हिंदी नाटक के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान किया और शीघ्र ही बहुत लोकप्रिय हो गए। उनके 'आषाढ़ का एक दिन' और 'आधे-अधूरे' ने प्राचीन और आधुनिक दोनों प्रकार के रंगमंच में नई ज़मीन तोड़ी और अन्य नाटक भी बहुत पसंद किए गए। 'पैर तले की ज़मीन' भी इसी परंपरा में उनका एक श्रेष्ठ नाटक है जो संकट की परिस्थिति में मनुष्य के व्यवहार को व्यक्त करता है।
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