Ek Gadhe Ki Aatmakatha
कृश्न चन्दर के लोकप्रिय उपन्यास 'एक गधे की आत्मकथा' में आदमी की भाषा में बोलने वाले एक गधे के माध्यम से समाज के विभिन्न पहलुओं पर करारा व्यंग किया गया है। इस उपन्यास के विचित्र संसार में सरकारी दफ्तरों के निठल्ले आफीसर, लाइसेंस के चक्कर में घूमने वाले व्यवसायी, चुनाव के जोड़-तोड़ में लगे नेता, साहित्य के मठाधीश, मॉडर्न आर्ट के नाम पर जनता को चक्कर में डालने वाले कलाकार, अपने ही सुर से मोहित संगीतज्ञ, सौंदर्य के नाम पर भोंडेपन को अपनाने वाली निठल्ली महिलाएं मानो कार्टून की शक्ल में चलते-फिरते नजर आते हैं।
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