Dilli Chalo_Rajendra Mohan Bhatnagar_Hardbound
‘‘दिल्ली चलो’’ जीवन सत्य के दुर्द्धर्ष संघर्ष की अंतहीन गाथा है। समस्त स्वतंत्रता संग्राम को समझने की कुंजी है।
नेताजी सुभाष की अंतिम उत्कट आकांक्षा थी कि देश को शीघ्रातिशीघ्र आज़ाद कराएं और एक सर्वथा नए, शक्तिशाली, तथा श्रेष्ठ जीवनमूल्यों के साक्षी भारत को विश्व के सामने खड़ा करें।
ब्रिटिश सत्ता उनके प्राणों को हर लेने का हर संभव प्रयास करती रही, उन्हें देश से निष्कासित करती रही और सींखचों के पीछे डाल कर उनकी मृत्यु का इंतज़ार करती रही। हर बार उसने उनकी मृत्यु की आहट सुनकर ही उनको रिहा किया। विवश होकर उसे परायी धरती पर अपने देश की आज़ादी के लिए संघर्ष करना पड़ा।
वह भारतीय आत्मा के समग्र संघर्ष की समर्पित कहानी को दोहरा कर निस्संग योद्धा बने रहे।
‘दिल्ली चलो’ उनके मार्च का अप्रतिम आह्वान था। इसी मंत्र ने आगे चलकर ब्रिटिश सत्ता को भारत को आज़ाद करने के लिए विवश किया।
सुभाष को जाने बिना युवा पीढ़ी अपने को नहीं समझ सकती, यही इस उपन्यास को रचने का मूक मन्तव्य है।
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