Kabuliwala

Kabuliwala
Hindi
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978-8-170-28226-6

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सूखे मेवे बेचने वाले एक बूढ़े अफ़गानी और एक नन्हीं बच्ची के बीच किस तरह किसी बाप-बेटी जैसा पवित्र प्रेम विकसित हुआ है, रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी इस अनुपम कहानी में यही चित्रित किया है। इस कहानी की गिनती बच्चों के लिए लिखी गई महान पुस्तकों में की जाती है। दुनिया भर में पढ़ी और सराही गई इस महान कहानी को हिन्दी और बंगला भाषा में कई बार सिनेमा के पर्दे पर उतारा गया और हर बार दर्शक उसे देखने को उमड़ पड़े।