Dharm Ki Balivedi Par
Hindi
महाशय राजपाल जी ने आज से 70 वर्ष पूर्व धर्म के लिए अपने प्राणों की बलि दी। अपने आदर्शों और सिद्धांतों पर प्राण निछावर करने वाले राजपाल जी में विनम्रता भी थी और निडरता और साहस भी।मौत की धमकियों की परवाह न करते हुए वे सच्चाई तथा धर्म के मार्ग पर अडिग रहे और अभिव्यक्ति तथा प्रकाशन की स्वतंत्रता के लिए अंतिम क्षण तक संघर्ष करते रहे।राजपाल जी ने पुस्तक प्रकाशन के क्षेत्र में भी अनेक नए आयाम स्थापित किए।आज से सात दशक पूर्व उन्होंने एक साथ चार भाषाओं में स्तरीय प्रकाशन किया।देश की आज़ादी की लड़ाई में प्रकाशन द्वारा महत्वपूर्ण योगदान दिया और उसके लिए ब्रिटिश सरकार के कोपभाजन बने।इस पुस्तक में राजपाल जी के संघर्षमय जीवन और बलिदान की गाथा को जाना जा सकता है।
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